तीर्थ नगरी पुष्कर श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केन्द्र

INN/PUshkar, @Infodeaofficial
तीर्थ नगरी पुष्कर श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केन्द्र है। यह आध्यात्मिक वातावरण और अपनी नेसर्गिक सुंदरता से देशी-विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यहां ब्रह्मा मंदिर के अलावा यहूदियों का पूजा का स्थल भी है। इसकी खास बात यह है कि यह 8 महीने बंद रहता है बाकी चार महीने खुलता है। इस दौरान यहूदियों का प्रसिद्ध त्यौहार सुकौत मनाया जाता है।
तीर्थ नगरी पुष्कर श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है । यहां का आध्यात्मिक वातावरण और नैसर्गिक सुंदरता हमेशा से देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता आया है । अजमेर एक ऐसा जिला हैं, जो जितना दिखने में खूबसूरत है । उतना ही धार्मिक तौर पर सजग भी कहा जा सकता है । ये शहर हिंदू, मुसलमान, सिखों और जैनियों के अलावा यहूदियों को भी ब्रह्मनगरी पुष्कर काफ़ी पसंद है । यहीं पुष्कर में यहूदियों का बेद खबाद भी बनाया गया है । हाल ही में बड़ी संख्या में इजरायली यहां पहुंचे हैं ।
बेद खबाद यानी यहूदियों का पूजा करने का स्थल जिसकी स्थापना यहां लगभग 22 साल पहले की गई थी. यहां की खास बात ये है । कि साल के 4 महीने इसमें ताला लगा रहता है और 8 महीने एक हफ्ते के त्योहार सुकौत के साथ ही ये खुल जाता है । और यहां रौनक बढ़ जाती है । इस त्यौहार के दिनों पुष्कर इजरायली श्रद्धालुओं से गुलजार रहता है। बीते दिनों सुकौत मनाने के बाद भारत पधारे इजराइली पुष्कर को explore करते देखे जा सकते हैं । इजरायलियों के पुष्कर में व्यापारिक संबंध भी अच्छे हैं । दरअसल पुष्कर में चांदी और आर्टिफिशियल ज्वेलरी का काम होता है । खबाद हाउस के प्रबंधक ने बताया कि पुष्कर आने वाले विदेशी पर्यटकों में इजरायली पर्यटकों की संख्या हमेशा से अधिक रही हैं ।
देश में कुल 18 बेद खबाद बने है। इनमें से सबसे बड़ा बेद खबाद अब पुष्कर बन चुका है । नतीजतन स्थानीय लोगों से इजरायली पर्यटक घुल मिल जाते हैं। यहां की नैसर्गिक सुंदरता ओर आस्था से इजरायली श्रद्धालु खिंचे चले आते हैं। यही वजह है कि इजरायली पर्यटकों के ब्रह्मनगरी के प्रति उमड़े अगाध प्रेम के चलते खबाद हाउस की स्थापना की गई। जो यहां आने वाले इजरायली नागरिकों की मदद का काम करता है। इजरायली पर्यटकों के लिए पुष्कर हमेशा से पसंदीदा रहा है । और कई इजरायली युवतियों ने यहां आकर स्वेच्छा से विवाह कर यहीं रहने लगी हैं ।

